अच्छा

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अब तो इच्छाए प्रबल हो रही है।

चाहते अपने अधिकारों को पाने की ।

छल और कपट को दूर कर ।

सब कुछ पा लेने की।

अभी तो यह शुरूवात है ।

चेन से अब नहीं बैठने वाले नही हम।

छीन लेंगे सारे अधिकार।

अच्छा करने की चाहत प्रबल हो गयी है।

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