प्रेम

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किसी को सरलता से मिल जाता है।
किसी को काफी परिश्रम के बाद मिलता है ।
युवा वर्ग इसको पाने के लिए हर सीमा पार कर लेता है।
जीवन भर प्रयास करके भी भाग्यहीन इसको नहीं पाते।
यत्र, तत्र और सर्वत्र उप्लब्ध रहता है।
यही विश्व शांति का स्रोत्र है।
इसके रूप अनेक होते है ।
रूप ही इसको पहचान देते है।
पहचान के लिए सिर्फ एक दिल चाहिए होता है।
और दिल ही कहता है हाँ यही प्रेम है, हाँ यही प्रेम है।

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